विटामिन डी हमारे लिए बहुत ही जरूरी विटामिन है। यह विटामिन हमारे पूरे शरीर को मजबूती प्रदान करता है , यह एक फैट सॉल्युबल विटामिन है यह मसल्स को मजबूत बनाकर रखता है जिसके वजह से शारीरिक अंग सुचारु रूप से सही से कार्य करता है इसकी कमी के वजह से चलने फिरने में दिक्क्त महसूस होने लगती है। जब कोई कार्य करने पर थकान और एनर्जी में कमी जैसा प्रतीत हो तो हमें डॉक्टर से सलाह लेना चाहिए। आज कल की आराम दायक दिनचर्या और पर्याप्त धुप का न लेना भी इसका मुख्य कारण है।
पहले तो ये समस्या ज्यादा तर अधिक उम्र के लोगो में पायी जाती थी लेकिन आज कल यह समस्या युवाओं में भी ज्यादा तर पायी जाने लगी है। खासकर उन युवाओं में ज्यादा जो धुप में कम निकलते है। इसके आलावा कभी-कभी यह समस्या अन्य दूसरे कारणो से भी होती है।


विटामिन डी का कार्य :
विटामिन डी का कार्य हमारे शरीर में मौजूद कैल्शियम,मैग्नीशियम को सुचारु रूप से कार्य करने में मदत करता है। यह हमारे इम्युनिटी पॉवर को भी बढ़ाता है औरमानव  प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करता है जिसके वजह से रोगो से लड़ने की शक्ति बढ़ती है।इसके साथ यह नर्व को सुचारु रूप से सही रखने में मदत करती है।
विटामिन डी मुख्यतः 2 प्रकार के होते है
विटामिन डी 2-(Ergocalciferol)
विटामिन डी 3-(Cholecalciferol)


विटामिन डी की कमी से होने वाली परेशानीयां  :
विटामिन डी की कमी से आपको ये समस्याएं पैदा हो सकती है या ये समस्याएं नजर आये तो आप डॉक्टर की सलाह ले सकते है।

हड्डियों का कमजोर हो जाना :
विटामिन डी का स्तर ज्यादा दिन तक कम बना रहे तो आपकी हड्डियाँ कमजोर हो सकती है,और इसके साथ  हड्डियों में दर्द बना रह सकता है और ज्यादा वजन सामान उठाने में समस्या पैदा हो सकती है। हड्डियों की छमता में कमी आ जाती है और चोट लगने पर फ्रैक्चर की संभावना बढ़ जाती है। घुटनों और जोड़ो में दर्द होने लगता है।
थकान का होना :
इसकी कमी की वजह से थकान की समस्या होना स्वाभाविक है विटामिन डी की कमी का मुख्य प्रभाव मसल्स पर पड़ता  है जिसके वजह से शरीर बिल्कुल कमजोर पड़ जाता है जब हम कोई कार्य करते है तो एनर्जी लेवल न के बराबर होता है।

डिप्रेसन का होना :
विटामिन डी की कमी के वजह से डिप्रेसन की समस्या बढ़ जाती है।शरीर में हमेसा आलस्य बना रहता है इसका सीधा असर हमारे मूड पर पड़ता है जिसके वजह से हमारे माइंड में हार्मोनल बदलाव होते है।जिसके वजह से डिप्रेस रहना मुख्य कारण है। 

मूड में बदलाव :
अगर विटामिन डी का स्तर बहुत ही ज्यादा कम हो तो सरियस प्रॉबब्लेम हो सकती है। आपको चलने फिरने के साथ साथ जब आप देखते है तो आपके आँखों से हल्का धुआँ या कुहरा जैसा दिखाई देता है और मूड अपसेट रहता है लेकिन यह तभी होता है जब आपका विटामिन डी का स्तर  बहुत ही कम हो।

ब्लड प्रेसर पर असर :
विटामिन डी की कमी के वजह से ब्लड प्रेसर पर असर पड़ सकता है। इसका मुख्य कारण मसल्स का कमजोर होना है जिसके वजह से नर्व प्रॉपर और सुचारु रूप से कार्य नहीं कर पाता जिसका सीधा असर ब्लड प्रेसर पर पड़ता है क्योकि ब्लड को सुचारु रूप सेसंचालित करने वाली धमनिया कमजोर हो जाती है।

साँस लेने में तकलीफ :
विटामिन डी की कमी से साँस लेने भी दिक्कत महसूस होती है। कभी-कभी घुटन जैसा भी महसूस होता है अगर हम सही समय पर डाक्टर की मदत से विटामिन डी का खुराक ले तो इन सभी समस्याओं से निजात मिल सकती है।
कैंसर :
विटामिन डी कमी से कैंसर की भी समस्या पैदा हो सकती है क्योकि नई कोशिकाओं का निर्माण सही से नहीं हो पाता  जिसके वजह से इसकी संभावना ज्यादा हो जाती है।

विटामिन डी का स्तर कम क्यों होता है :
विटामिन डी का स्तर कम होने के बहुत सारे कारण है जिसमे से कुछ निम्न कारण इस प्रकार है। 

ज्यादा समय तक घरो मेंअंदर रहना बाहर न निकलना, जिसके वजह से पर्याप्त धुप नहीं मिल पाती और धीरे धीरे विटामिन डी का लेवल कम होने लगता है। 

यह समस्या ज्यादा वेजीटेरियन लोगो में पाया जाता है क्योकि शाकाहारी भोजन में विटामिन डी का न होना है
यह विटामिन egg yolk ,मीट में पाया जाता है। 

डार्क स्किन वाले लोगो में यह समस्या ज्यादा पैदा होती है ,क्योकि फेयर स्किन वाले लोगो की अपेक्षा डार्क स्किन वाले लोगो को विटामिन डी का अवशेषण करने में ज्यादा समय लगता है

कुछ causes में हमारी किडनी विटामिन डी को प्रोड्यूस नहीं कर पाती है जिसके वजह से विटामिन डी की समस्या हो सकती है।

इसका मुख्य कारण मोटापा का होना है लेकिन ज्यादा तर यह तभी होता है जब आपका  वजन एकाएक बड़े  तो विटामिन डी की कमी हो सकती है।

 किडनी में पथरी बनने के वजह से आप के विटामिन डी स्तर में कमी आ सकती है लेकिन यह तभी होता है ,जब पथरी काफी लम्बे समय तक बना रहे। इसका मुख्य कारण कैल्शियम ऑक्सलेट का होना है जिसके वजह से किडनी स्टोन की समस्या  होती है।

विटामिन डी की कमी से सर्वाइकल की भी समस्या हो सकती है।

 विटामिन डी की कमी को कैसे पूरा करे :-
विटामिन डी का सबसे प्रमुख स्रोत धुप है इसे सन साइन विटामिन भी कहा जाता है इसमें भरपुर मात्रा में विटामिन डी पाया जाता है। सुबह की ताज़ी धुप लेने से विटामिन डी की कमी को पूरा किया जा सकता है।

दुध और इससे बने डेयरी प्रोडक्ट जैसे मख्खन ,पनीर में विटामिन डी पाया जाता है कुछ हद तक विटामिन डी की समस्या पूरी की जा सकती है। 

अंडे में विटामिन डी पाया जाता है जो हमारे हेल्थ की दृष्टि से लाभ दायक है इसको अपने आहार में शामिल करके विटामिन डी की कमी को पूरा कर सकते है।

विटामिन डी की कमी को पिल्स के माधयम से डाक्टर के सलाह अनुसार ले सकते है। 
50000 /IU  हफ्ते एक बार लेना चाहिए जिसे 8 से 12 सप्ताह तक

500 /IU  प्रतिदिन लिया जा सकता है डाक्टर के सलह अनुसार

1000 /IU  और 25000 /IU  के dosage भी आते है। 
  ग्रेन्युअल्स में भी आता है जो बाजार में आसानी से मिल  जाता है।