असंभव कुछ भी नहीं इसको विल्मा रुडोल्फ ने साबित किया
vilma  rudolph
विल्मा रुडोल्फ वह नाम जिसने ये साबित कर दिया कि इस दुनिया में कोई ऐसा कार्य नहीं जिसे किया न जा सके। यह उस लड़की की कहानी है जिसको ढाई साल की उम्र में ही पोलियो हो गया ,जिसके वजह से वह चल  फिर नहीं सकती थी।
विल्मा रुडोल्फ का जन्म सन 1939 में अमेरिका के टेनेसी प्रान्त के एक गरीब घर में हुआ था। वह छोटी सी उम्र में दिव्यांग हो गयी। विल्मा रुडोल्फ ब्रेस के सहारे चलती थी ,उनका बचपन बहुत ही कष्ट से बीता , इन सबके बावजूद उनके हौसले में  कमी नहीं आई। डाक्टर ने कह दिया था कि वह कभी चल फिर नहीं सकती।
विल्मा रुडोल्फ की माँ एक साहसी और सकारात्मक मनोवृति  वाली महिला  थी। वह अपने बेटी का हमेसा हौसला बढ़ाती थी।
वह अपनी बेटी से कहती थी एक दिन तुम जरूर चलोगी।
विल्मा रुडोल्फ ने अपनी माँ से पूछा ,माँ क्या मै दौड़ सकती हूँ माँ ने कहा बिल्कुल तुम दौड़ सकती हो एक दिन तुम जरूर दौड़ोगी।
जब वह ११ साल की हुई की तब वह ब्रेस निकाल कर चलने का प्रयास करने लगी। चलने में उन्हें बहुत ही दर्द होता था। वह दर्द की वजह से परेशान हो जाती। चलने में गिर जाती थी चल नहीं पाती थी। इसके बाद भी प्रयास करती रहती और हार नहीं मानती।

प्रतिदिन प्रयास करते वह धीरे धीरे बिना ब्रेस के सहारे चलने लगी। अब उनमे पहले की अपेक्षा सुधार होने लगा ।
उनका इलाज कर रहे डॉक्टर एम्वे को यह बात पता चला तो उनको विश्वास नहीं हुआ। वह विल्मा रुडोल्फ से मिलने आये और अपने सामने ब्रेस उतार कर चलने को कहा। वह देखर हैरान हो गए। तब उन्होंने कहा यह एक दिन दौड़ेगी
13 वर्ष की उम्र में पहली बार उन्होंने प्रतियोगिता में हिस्सा लिया और सबसे आखिर स्थान पर आयी और इसी तरह वह कई प्रतियोगिताओ में हिस्सा लिया लेकिन सभी में आखिरी स्थान पर आती थी ,
इसके बावजूद  वह हार नहीं मानी और अपना प्रयास करती रही।

इसके बाद टेनेसी राज्य विश्वविद्यालय में प्रवेश मिलने के बाद अपने सपने को पूरा करने  में लग गयी।
और उनके मेहनत और प्रतिभा की वजह से सन 1960 में रोम ओलम्पिक में अपने देश का प्रतिनिधित्व करने का मौका मिला और उन्होंने अपने आप को साबित करते हुए, गोल्ड ओलम्पिक अपने देश के लिए जीता।
ओलम्पिक में विल्मा रुडोल्फ ने 100 ,200 और 400 मीटर रिले दौड़ में गोल्ड मैडल जीता और अमेरिका की पहली गोल मैडल जीतने वाली महिला  खिलाड़ी बनी।

विल्मा रुडोल्फ ने यह साबित कर दिया कि कोई भी काम मुश्किल नहीं है जरूरत है सिर्फ इच्छा सकती की। अगर आपके पास इच्छा सकती है तो आप कुछ भी कर सकते है जो आप चाहते है