कम बोलना हमारे जीवन के लिए और हमारे । कम बोलने से हमारा व्यक्तित्व अच्छा होता है
kam bolana

कम बोलना हमारे व्यक्तित्व  के लिए और हमारे लिए महत्वपूर्ण है । कम बोलने से हमारा व्यक्तित्व अच्छा होता है  और हमे हर जगह सम्मान मिलता है ,अगर हम कम बोलते है तो हमारे बात का वजन होता है । और साथ ही साथ हमारे बात को लोग सुनते है ,कम बोलने का  ये मतलब नहीं कि आपको किसी की फालतू बातो को सुनना है ।ऐसा नहीं है,कम बोलने का मतलब ,उसी बातो का उत्तर हमे देना चाहिए जितनी हमे आवश्यकता है।              

अगर हम कहीं ज्यादा बोलते हैं  तो हमारे बातो का वजन कम होता है।और हमारे बातो को सम्मान भी नहीं मिलता,
 किसी से बात करते समय वही बोलना चाहिए जो वहाँ पर बोलने के लिए जरूरी हो ,कुछ भी अनाप सानाप नहीं बोलना चाहिए,ज्यादा बोलने से कभी कभार ऐसी बाते निकल जाती है जोकि सामने वाले को अच्छा नहीं लगती ।जिससे उसके सम्मान को ठेस तो पहूचता ही है।साथ-साथ हमारे सम्मान में भी कमी आती है ।ऐसा करने से लोग आपकी बातो को अहमियत भी देना कम कर देते है।और हमारी बातो का वजन भी कम हो जाता है ।कम बोलना यह हमारे जीवन जीने की कला होना चाहिए।यह हमारे आचरण के लिए और हमारे जीवन के लिए महत्वूर्ण है । उतना ही बोलना चाहिए जितने से सामने वाले को उत्तर मिल जाय
अगर हम उतना ही बोलते है जितनी हमे आवश्यकता है तो हमारा व्यवहार बना रहता है ।जब आपका व्यव्हार बना  रहता है तो आपको सम्मान मिलेगा ,जब आपको सम्मान मिलेगा तो आपकी बातो को वजन मिलेगा। 


जब आप कम बोलते है तो आपके जुबान से बात सही निकलती  है। कभीबन -कभार ज्यादा बोलने से जुबान से फालतू बात निकलती है जिससे हम हसी के पात्र बन जाते है। 

कम बोलना हमारे गंभिरता का प्रतिक है जो ए दर्शाता है कि हमारे बात का क्या वजन है।अगर हम कम बोलते है। तो  हमारी बातो को गंभीरता से लेते है और ध्यान से सुनते है। और ज्यादा बोलने से लोग हमारे बातो को गंभीरता से नहीं लेते है।
चुप रहने वाला व्यक्ति या सांत स्वभाव का व्यक्ति कही ज्यादा प्रभाव छोड़ता है ज्यादा  वाले के तुलना में ,इसलिए हमें जरूरत से ज्यादा समाज में नहीं बोलना चाहिए हमें उतना ही बोलना चाहिए जितनी की हमें अवश्यकता  है 


कभी किसी को छोटा नहीं समझना

साहस व्यक्ति को बुरे वक्त से निकालता है 

 सफल और असफल