nelson mandela biography in hindi
नेल्सन मंडेला 

नेल्सन मंडेला 

नेल्सन मंडेला एक ऐसे सख्सियत का नाम है जिन्होंने रंगभेद के खिलाफ लड़ाई में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाया। जिन्होंने पुरे दुनिया से रंगभेद मिटाने के लिए आवाज उठाई और रंगभेद का विरोध किया। उनके विचार महात्मा गाँधी से मिलते थे वे महात्मा गाँधी के विचारो से प्रभावित थे जिन्होंने पूरी दुनिया में रंगभेद के खिलाफ जनांदोलन पैदा किया। वह अहिंसा के मार्ग पर चलते हुए आगे बढे। 

नेल्सन मंडेला के जीवन के बारे में संक्षिप्त विवरण 

नेल्सन मंडेला का जन्म 18 जुलाई 1918 को म्वेजो,केप प्रान्त,दक्षिण अफ्रीका में हुआ था। उनके बचपन का नाम रोलीह्लला मंडेला था।उनके पिता का नाम गेडाली हेनरी म्फाकेनिस्वा था और उनकी तीसरी पत्नी नेक्यूफी नोसकेनि के यहाँ हुआ था। वह अपनी माँ नोसकेनी के प्रथम पुत्र थे और अपने पिता के 13 संतानो में तीसरे पुत्र थे नेल्सन मंडेला के पिता हेनरी म्वेजो कसबे के जनजातीय सरदार थे स्थानीय भाषा में सरदार के बेटे को मंडेला कहते है उनकी माता मेथोडिस्ट थी। मंडेला  काफी छोटे थे तभी उनके पिता की मृत्यु हो गयी थी। उस वक्त उनकी उम्र 12 वर्ष थी। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा क्लार्कबेरी मिशनरी स्कूल से पूरी की , उन्होंने स्कूली शिक्षा मेथोडिस्ट मिशनरी स्कूल से प्राप्त की।

नेल्सन मंडेला ने अक्टूबर 1944 को इवलिन मेस से शादी की। 1961 में उन्होंने अपनी दूसरी शादी नोमजानो विनी मेडीकिजाला से किया और उसी  समय उन पर देशद्रोह का मुकदमा चल रहा था और अदालत ने उनको निर्दोष पाया, इसी समय उनकी मुलाकात उनकी दूसरी पत्नी से हुई थी। और तीसरी 1998 में उन्होंने अपने 80 वे जन्म दिन पर ग्रेस मेकल से विवाह किया। नेल्सन ने तीन शादियाँ की जिनसे 6 संताने हुई।
उनकी मृत्यु 5 दिसंबर 2013 को ह्यूस्टन जोहान्सबर्ग दक्षिण अफ्रीका में हुआ।

मंडेला ने 1952  में अपनी क़ानूनी लड़ाई लड़ने के लिए एक क़ानूनी फर्म की स्थापना की जिससे उनकी लड़ाई तेज हो सके।अब दिनों पर दिन उनकी लड़ाई रंग भेद के खिलाफ तेज हो रही थी। और उनकी लोकप्रियता काफी तेजी से बढ़ रही थी उनकी बढ़ती हुई लोकप्रियता को देख कर अब उनके ऊपर प्रतिबन्ध लगाने की तैयारी होने लगी और आखिर कार उन पर प्रतिबन्ध लगा दिया गया और  प्रतिबन्ध लगाने के बाद उनको जोहान्सबर्ग के बाहर भेज दिया गया। इसके बाद भी वे अपनी लड़ाई को  रंग भेद के खिलाफ जारी रखे ,अब वे किसी भी बैठक  में भाग नहीं ले सकते थे ,सरकार के दमन चक्र में वे पूरी तरह फस चुके थे।

सरकार के दमन चक्र से बचने के लिए नेल्सन ने एक प्लान बनाया  और निर्णय लिया कि कांग्रेस को छोटे टुकङो में तोङकर काम किया जाय और जो भी आंदोलन किया जाय वह भूमि गत हो कर किया जाय ,इसके बाद वह भूमि गत हो कर काम करने लगे। बाद में वह क्लिप टाउन चले गए वहाँ पर जाकर भी भूमि गत काम किया। वह उस हर संगठनो में  काम किये जो अश्वेतों की स्वतंत्रता के लिए काम कर रहे थे उनके साथ मिलकर संघर्ष किया।
सरकार के  विरोध के बावजूद नेल्सन का जनाधार तेजी बढ़ रहा था ,और सरकार आंदोलन तोड़ने का हर प्रयास  कर  रही थी।   

          राजनीतिक  उतार चढ़ाव 

1941 में इनकी मुलाकात जोहन्सबर्ग में वॉल्टर सिसुलू और वॉल्टर एल्बर्टाइन से हुई। इन दोनों लोगो से मुलाकात के बाद वे काफी प्रभावित हुए। उन्होंने क़ानूनी फर्म में भी काम किया और राजनीती में उनकी इच्छा बढ़ती जा रही थी।

1944 में वे अफ्रिकन नेशनल कांग्रेस में शामिल हो गए ,इसके बाद उन्हों ने अफ्रीकन नेशनल कांग्रेस यूथ लीग  की स्थापना की  और 1947 में लीग के सचिव चुने गए।  
5 अगस्त 1962 को मजदूरों को उकसाने और बिना अनुमति लिए देश छोड़ने के आरोप में कैद कर लिया गया। 
मुक़दमा चलने के बाद 12 जुलाई 1964 को उम्र कैद की सजा सुनाई गयी। सजा मिलने के बाद भी उनका उत्साह कम नहीं हुआ ,उन्होंने ने अपने आंदोलन को जेल में भी चालू रखा और रंग भेद के खिलाफ अपनी लड़ाई को तेज करते रहे।

वह 27 वर्ष कारागार  में बंद रहे और अंततः 11 फरवरी 1990 को उनको कारागार से मुक्त किया गया। 

1994 में रंग भेद रहित चुनाव हुए ,जिसमे अफ्रिकन नेशनल कांग्रेस ने बहुमत के साथ सरकार बनाई।
10 मई 1994 को मंडेला अपने देश के प्रथम अश्वेत रास्ट्रपति बने।

पुरस्कार एवं सम्मान 


नेल्सन मंडेला को उनके देश में "लोकतंत्र के प्रथम संस्थापक "एवं  राष्ट्रीय मुक्ति दाता और उद्धारकर्ता के रूप में जाना जाता है। दक्षिण अफ्रीका में उन्हें महात्मा गाँधी के रूप में भी जाना जाता है और उनकी छवि भी गाँधी वादी की तरह ही थी।  2004  में जोहन्सबर्ग स्थित सैंडटन स्क्वयर शॉपिंग सेंटर में उनकी प्रतिमा स्थापित की गयी ,और उसके बाद उनके सम्मान  सेंटर का नाम बदलकर नेल्सन मंडेला स्क्वायर रख दिया गया और दक्षिण अफ्रीका में उन्हें मदीबा कह कर बुलाया जाता है जो वहा पर बुजुर्गो के लिए सम्मान का सूचक है।

उनके जन्म दिन 18 जुलाई को सयुंक्त राष्ट्र सभा ने रंग भेदी संघर्ष के लिए उनके सम्मान में मंडेला दिवस घोषित किया

नेल्सन मंडेला को विश्व के अनेक देशो और संस्थाओं द्वारा 250 से भी अधिक सम्मान और पुरस्कार दिए गए।
1993 में दक्षिण अफ्रीका के पूर्व राष्ट्रपति फ्रेडरिक विलेम डी क्लार्क के साथ सयुंक्त रूप से नोबेल शांति पुरस्कार दिया गया

1990 में भारत रत्न दिया गया और भी विभिन्न देशो से सम्मान दिए गए  जैसे की 23 जुलाई 2008 को गाँधी शांति पुरस्कार ,प्रेसीडेंट मैडल ऑफ़ फ्रीडम , ऑर्डर ऑफ लेनिन ,निशान-ए-पाकिस्तान इत्यादि

नेल्सन मंडेला  के ग्रेट विचार


वह अपने जीवन में हमेसा अहिंसा का सहारा लेते थे और अहिंसा के मार्ग पर चलते थे।

ह्रदय के अंदर जो प्रकाश है उसे बुझाया नहीं जा सकता वह हमेसा जलता रहता है।

आप चाहे जितना भी परेशान हो आपको चुप चाप बैठना नहीं होगा ,आपको आगे बढ़ना होगा और जीवन का आनंद उठाना होगा।

गिर कर बार -बार उठना ही सफलता के रास्ते खोलता है।

आप अपने अच्छे सोच और अपने संकल्प से दुनिया को बदल सकते है।

मै जातिवाद से घृणा करता हूँ मुझे यह बर्बरता लगती है चाहे वह अश्वेत व्यक्ति से आ रही हो या श्वेत  व्यक्ति से आ रही हो।



 रतन टाटा भारत के महान उद्योगपति  है जो बहुत ही सरल स्वभाव के लिए भी जाने जाते है।  
कभी किसी को छोटा नहीं समझना